मुझे इस बात की खुशी है कि 28 दिसंबर 2023 से कांग्रेस सेवा दल का 100वां स्थापना दिवस आरंभ हो रहा है। कांग्रेस के 139 साल के इतिहास में सेवा दल सबसे पुराना फ्रंटल संगठन है।
सेवा दल की अवधारणा नागपुर के ऐतिहासिक झंडा सत्याग्रह के दौरान नागपुर सेंट्रल जेल में जन्मी, जब बड़ी संख्या में स्वयंसेवक जेल में कैद थे। महान नायक डॉ. एन एस हार्डीकर सेवा दल के विचारों के प्रणेता थे। 1923 में काकीनाडा महाधिवेशन में श्रीमती सरोजनी नायडू ने सेवा दल की विधिवत स्थापना का प्रस्ताव रखा और यहीं इसे कांग्रेस के स्वयंसेवक संगठन की मान्यता मिली। लाला लाजपत राय और श्रीमती सरोजिनी नायडु ने यहीं देश की युवा शक्ति से अपील की थी कि वे सेवादल के स्वयंसेवक बनें। आरंभ में इसका नामकरण हिंदुस्तानी सेवा दल हुआ जिसे बाद में कांग्रेस सेवा दल किया गया।
सेवादल के प्रथम अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू और संस्थापक सचिव डॉ. हार्डीकर थे। महात्मा गांधीजी, सुभाष चंद्र बोस, मौलाना शौकत अली, वी सांबमूर्ति, टी सी गोस्वामी जैसी शख्सियतों ने भी सेवा दल के अध्यक्ष पद को सुशोभित किया। सेवा दल के प्रशिक्षण शिविरों में लाल बहादुर शास्त्री, पंडित गोविंद बल्लभ पंत तथा दुर्गाबाई देशमुख जैसी हस्तियों को प्रशिक्षण मिला।
सेवादल संगठन का कर्नाटक प्रांत के साथ गहरा संबंध रहा है। काफी समय तक सेवा दल मुख्यालय हुबली में था। घटप्रभा में पद्मभूषण डाक्टर एन एस हार्डीकर की समाधि, सेवा दल अकादमी और उनकी महान रचना कर्नाटक आरोग्य धाम (KHI) भी है। कर्नाटक में ही 1924 में बेलगांव (अब बेलगावी) कांग्रेस महाधिवेशन में महात्मा गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बने तो गणवेश (Uniform) में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों ने ऐतिहासिक काम किया, जिसकी सराहना करते हुए गांधीजी ने कहा था कि “बेलगांव में स्वयंसेवकों ने सबसे अधिक योग्यता और दक्षता का परिचय दिया। वे मेहनती और योग्य है और और उन्होंने खुशी खुशी काम किया। उन्हें अपने हिस्से से भी ज्यादा काम करना पड़ा। प्रतिनिधियों से मैने उनकी कोई शिकायत नहीं सुनी। हम स्वयंसेवकों की योग्य सहायता के बिना कांग्रेस का कोई अधिवेशन नहीं कर सकते।”
आजकल जब स्वयंसेवकों की चर्चा होती है तो बहुत से लोगों को इसका संबंध आरएसएस के साथ नजर आता है। वास्तविकता यह है जब आरएसएस की स्थापना का विचार भी नहीं आया था तब कांग्रेस ने स्वयंसेवक संगठन खड़ा कर दिया था। सेवा दल का विधिवत गठन आरएसएस की स्थापना के दो साल पहले किया जा चुका था।
सेवा दल की पहचान अनुशासन और मर्यादा के संगठन के रुप में है। इसका मुख्य काम कांग्रेस के लिए कैडर निर्माण करना है। सेवा दल ने छुआछूत और सांप्रदायिकता के खिलाफ मुहिम चलाई। भाई चारा और देशभक्ति सेवा दल की विशिष्टता रही है। अलग-अलग कालखंडों में स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण समेत विभिन्न विषयों पर सेवा दल ने हिंदी अंग्रेजी, मराठी, कन्नड़ और गुजराती में पुस्तकों का प्रकाशन भी किया है।
आजादी की लड़ाई और राष्ट्र निर्माण में कांग्रेस सेवा दल के स्वयंसेवकों की अग्रणी भूमिका रही। जनवरी 1953 में हैदराबाद में हुए अखिल भारतीय सेवा शिविर के बाद सेवा दल ने तमाम योजनाओं का प्रचार-प्रसार और सामुदायिक काम आरंभ किया और श्रमदान किया। इस अवसर पर मैं एस. वी. ईनामदारजी का पुण्य स्मरण भी करना चाहूंगा जिन्होंने 1948 से 1974 तक अखिल भारतीय संगठक के रूप में काम किया और सेवादल के मैन्युअल्स के साथ सांगठनिक स्वरूप में अहम भूमिका निभाई।
सेवा दल का शानदार अतीत भविष्य के लिए शानदार प्रेरणा का स्त्रोत है। मुझे खुशी है कि इस अवसर पर डॉ. एन.एस. हार्डीकर अकादमी घटप्रभा, दल दिवस मना रही है। इस मौके पर मैं देश भर के सेवा दल के सभी स्वयंसेवकों और टीम को बधाई और शुभकामना देते हुए आह्वान करता हूं कि वे जन जन तक कांग्रेस के विचारों को पहुंचाने के लिए शताब्दी वर्ष में एक नया संकल्प लेंगे।
शुभकामनाओं के साथ
मर्दिकार्जुन खरगे



