प्रियंका गांधी
मेरे लिये एक वो शख़्स, जिनसे मुझे बेहद प्यार है – मतलब बहुत सारा वाला
मैंने उन्हें जितना जाना है, जितना देखा है, उनके अंदर एक ग़ज़ब की कूवत है किसी को अपना बना लेने की
वो एक बेहद संवेदनशील इंसान हैं, लेकिन उतनी ही साहसी भी हैं
बेहिसाब मेहनती हैं और बेपनाह ज़िंदादिल भी
उनके साथ काम करने में खूब मज़ा आता है – काम कभी बोझिल नहीं लगता- बहुत सारी हंसी-ख़ुशी के साथ काम होता है
अपने परिवार के लिए वह शेरनी की तरह खड़ी रहती हैं और जनता की बुलंद आवाज़ बनकर दुनिया के सामने आती हैं
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मुझे याद है – 2022 के विधानसभा चुनाव में लाख विरोध के बावजूद उन्होंने महिलाओं को 40% टिकट देकर एक बहुत बड़ी पहल की
मैंने उनकी निर्भीकता लखीमपुर में देखी है, हाथरस में देखी है, सोनभद्र में देखी है. पुलिस प्रशासन और सरकार के अन्याय के ख़िलाफ़ जब वो अड़ जाती हैं तो पीछे नहीं हटतीं
वो बहुत ज़िद्दी हैं, एक बार कुछ ठान लिया तो कर के ही मानेंगी. ईश्वर में अटूट आस्था है, तमाम व्रत करती हैं और हर त्यौहार को पूरी रौनक़ से मनाती हैं
लोगों का आदर और स्नेह वो अपने तक समेट कर नहीं रखतीं. खूब ज़ोर से गले लगाती हैं और ममता का सागर उड़ेल देती हैं
वो महिला सशक्तिकरण की ध्वजवाहक हैं – और उतनी ही शिद्दत से एक माँ, पत्नी, बेटी और बहन होने का किरदार निभाती हैं
मुझे याद है किसी ने उनसे एक बार यूपी में पूछा था कि आप 10 साल पहले राजनीति में क्यों नहीं आयीं? और उन्होंने बेझिझक होकर मुस्कुराते हुए कहा- क्योंकि तब मेरी बेटी 8 साल की थी!
नवरात्रि के दौरान एक मंदिर से निकलीं और पत्रकार ने पूछ लिया आपने क्या माँगा? तो बोलीं बताया थोड़े ही जाता है – फिर मुस्कुरा कर बता ही दिया कि अपने बेटे के लिए प्रार्थना की
लखनऊ में एक शाम पुलिस से जद्दोजहद के बाद उन्होंने पहला फ़ोन घर किया और बेटे से पूछा मामा की तबियत अब कैसी है? – राहुल जी को उस दिन बुख़ार था
अपने पिता की लाडली प्रियंका जी की माँ से बेहद घनिष्ठता है. उन्हें अपनी माँ को हर परिस्थिति में इस देश के लिए काम करते देखा है. जिस दिन सोनिया जी ने अपना पदभार खरगे जी को सौंपा — उस दिन उनकी एक फोटो जिसमें उन्होंने राजीव जी की तस्वीर हाथ में ली हुई थी — उसके नीचे लिखा —So proud of you Ma, I know you did it all for love
एक दिन उन्होंने हँस कर यह बताया था कि वह 19 साल की उम्र से करवा चौथ का व्रत रख रही हैं
प्रियंका गांधी अन्याय तो रत्ती भर नहीं सहतीं और बेलगाम सत्ताधीशों की नकेल कसना उनके खून में है
सालों से उन्होंने संगठन को मज़बूत करने का काम किया है, समस्याओं को पर्दे के पीछे रह कर सुलझाया है, पूरी बेबाक़ी से चुनाव प्रचार किया है, तमाम चुनाव लड़वाए और जितवाए हैं
और अब उनकी बारी है. भारत की संसद को उनका इंतज़ार है— एक ऐसी शख़्सियत का जो ग़लत को पूरी ताक़त से ग़लत कहने की हिम्मत रखती हैं और सच और न्याय के लिए किसी लड़ाई से कभी पीछे नहीं हटतीं
आप आधी आबादी के मिसाल बनेंगी जिनके लिए राजनीति कठिन मानी जाती है. आप हमारी आवाज़ बन कर संसद में गूंजेंगी.
उम्मीदों का एक लंबा कारवाँ और देश भर का हौसला और मोहब्बत का सैलाब आपके साथ है और कह रहा है
प्रियंका जी – विजयी भव!
– Supriya Srinate




