मोदी सरकार कांग्रेस पार्टी को निशाना बनाने के लिए धमकी की राजनीति कर रही है।: Abhishek Manu Singhvi

6 months ago

मोदी सरकार श्रीमती सोनिया गांधी जी, राहुल गांधी जी और कांग्रेस पार्टी को निशाना बनाने के लिए धमकी की राजनीति कर रही है।

अर्थव्यवस्था की बर्बादी, देश में फैलती नफरत, बेरोजगारी, फेल विदेश नीति, अमेरिका और चीन की धमकी से देश का ध्यान भटकाने के लिए सरकार नेशनल हेराल्ड का मुद्दा उछाल रही है।

ED और BJP को तो नोबेल प्राइज मिलना चाहिए कि जहां कोई अपराध ही नहीं हुआ हो वहां कैसे क्राइम पैदा किया जाता है।

नेशनल हेराल्ड का मामला इकलौता ऐसा उदाहरण है, जहां एक भी पैसे के लेनदेन या फायदे के बिना मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनाया जा रहा है। इसे तो दुनिया के अजूबों में गिना जाना चाहिए।

नेशनल हेराल्ड की पैरेंट कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) बहुत पुरानी कंपनी है। ये कंपनी ब्रिटिश काल में अंग्रेजों के ख़िलाफ़ भी खड़ी थी। कई बार देखा गया है कि आदर्शवाद पर स्थापित संस्थाएं कई बार आर्थिक रूप से बेहतर प्रदर्शन नहीं करतीं। यहीं AJL के साथ हुआ।

अपने इन्हीं आदर्शों को बनाए रखने के लिए AICC ने अलग-अलग समय पर AJL को लोन दिया। जो एक वक्त 90 करोड़ रुपये हो गया था।

ऐसे में फैसला लिया गया कि कैसे इस कंपनी को मज़बूत किया जाए। इसलिए लिए जरूरी था कि कंपनी को कर्ज मुक्त किया जाए। इसीलिए उसके कर्जे को हिस्सेदारी में बदल दिया गया। ये काम देश में हर कंपनी करती है।

AJL के लोन को हिस्सेदारी में बदलने के लिए एक दूसरी कंपनी बनाई गई, यंग इंडियन। इसके बाद AJL का कर्ज यंग इंडियन को असाइन कर दिया गया और AJL की शेयर होल्डिंग यंग इंडियन के हाथ में आ गई। इस पूरे प्रोसेस में न तो कोई पैसा मूव हुआ और न ही कोई प्रॉपर्टी।

AJL की कंट्रोलिंग कंपनी यंग इंडियन बन गई। यंग इंडियन में ऑस्कर फ़र्नांडिस जी, मोतीलाल वोरा जी, सैम पित्रोदा जी, सुमन दुबे जी, सोनिया गांधी जी, राहुल गांधी जी और अन्य लोग हैं। ये सभी लोग कांग्रेस के आदर्शों से जुड़े हुए लोग हैं।

यंग इंडियन नॉट फॉर प्रॉफिट कंपनी है। यानी ये कंपनी न तो प्रॉफिट बना सकती है, न डिविडेंट देती है, न ही डायरेक्टर्स को किसी तरह की सैलरी या अन्य सुविधाएं देती है।

इसी आधार पर सरकार कह रही है कि AJL की 99% हिस्सेदारी यंग इंडियन के पास चली गई है, इसलिए AJL की सभी संपत्तियां भी यंग इंडियन के पास चली गईं और मनी लॉन्ड्रिंग हो गई। ये विचित्र बात है।

इस मामले में एक चार्जशीट पहले ही फाइल हो चुकी है। जो चार्जशीट फाइल हुई थी, वह अभी राउज एवेन्यू के स्पेशल कोर्ट में लंबित है। मैंने इस मुद्दे पर बहस की थी कि ये चार्जशीट निरस्त है, क्योंकि ED के एक्ट में लिखा है कि जो विभाग/यूनिट सरकारी हो, सिर्फ वही शिकायत कर सकता है।

मगर इस मामले में सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट जाकर प्राइवेट शिकायत की थी। इस प्राइवेट शिकायत के आधार पर केस शुरू हुआ था और कुछ समय बाद सुब्रमण्यम स्वामी ने खुद इस शिकायत को हाईकोर्ट से स्टे करवा दिया था।

यानी ये शिकायत प्राइवेट थी और इस मामले में सरकारी शिकायत कभी नहीं थी। इस पर मैंने चार महीने पहले दलील दी थी कि जब इस मामले में सरकारी शिकायत है ही नहीं तो केस में ED शामिल ही नहीं हो सकती। क्योंकि ED के एक्ट में यह लिखा है कि शिकायत सिर्फ वही कर सकता है जो इमपॉवर्ड ऑफिसर हो, लेकिन सुब्रमण्यम स्वामी तो ऑफिसर है नहीं। इस मामले में निर्णय अभी तक रिजर्व है।

मुझे कोई संदेह नहीं है कि इसी कमी को ठीक करने के लिए ये नई FIR दर्ज की गई है। अब इसी को आधार बनाया जाएगा। पहले सिवाय सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत के अलावा कोई दूसरा आधार नहीं था।

BJP की राजनीति है- विपक्ष को थकाओ, झूठ को सजाओ और एजेंसियों को नचाओ। उसका नया नारा है- न सबूत, न तर्क सिर्फ टार्गेट.. और टार्गेट हम जानते हैं- कौन है?

इस पूरे मामले में न कोई पैसे का ट्रांसफर हुआ, न धोखाधड़ी हुई, न ही कोई कमाई हुई। फिर भी BJP ने मनी लॉन्ड्रिंग की कहानी बनाई। BJP का बस एक ही उद्देश्य है- विपक्ष को डराओ, जनता को भरमाओ और एजेंसियों को दौड़ाओ।

जहां नींव ही नहीं है, वहां इमारत कैसे खड़ी होगी? यानी जब कोई अपराध ही नहीं हुआ तो फिर मामला कैसे बनेगा।

BJP को समझ लेना चाहिए कि अगर आवाज़ दबाएगी तो वो और बुलंद होगी। सच को दबाओगे तो वो और प्रचंड होगा।

हम न झुकेंगे, न रुकेंगे। BJP को जवाब कानून देगा, समय देगा और जनता देगी।

– Abhishek Manu Singhvi, AICC लॉ, ह्यूमन राइट्स व RTI विभाग के चेयरमैन

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