इस मामले में ग्लोबल ऑर्गेनिक टेक्सटाइल स्टैंडर्ड ने 11 कंपनियों का Major accreditation certificate साल 2020 में कैंसिल कर दिया। साल 2021 में USA के एग्रीकल्चर विभाग ने और यूरोपियन यूनियन ने 5 भारतीय प्रमाणकर्ताओं की मान्यता समाप्त कर दी।
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इतना ही नहीं, न्यूयॉर्क टाइम में खबर छपी कि भारत के 80% जैविक कपास निर्यात पर गलत लेबल लगा है। यानी एक तरह से इंटरनेशनल मार्केट में भारत की विश्वसनीयता समाप्त हो गई।
जब मेरे सामने ये सारी बातें सामने आईं तो 27 अगस्त 2024 को मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। इस पत्र के जवाब में 28 नवंबर 2024 को पीयूष गोयल जी ने बताया कि 👇
“मैं आपको सूचित करना चाहता हूं कि जैविक कपास के प्रमाणीकरण में अनियमितताओं पर जुलाई एवं अगस्त 2024 में जांच की गई।
राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम में गंभीर उल्लंघन के आधार पर एक प्रमाणन निकाय को एक वर्ष की अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया और कुछ और पर कार्रवाई जारी है।”
इस मुद्दे को इंदौर के पुलिस आयुक्त और धार, मध्य प्रदेश के अधीक्षक के समक्ष दिया गया है- ताकि वह मामले में संज्ञान लेकर कानूनी कार्रवाई करें और FIR दर्ज करें।”
• इस पत्र में उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। मैंने इस विषय में संसद में सवाल पूछा, तब मंत्रालय ने भी माना कि इस विषय में गड़बड़ी हुई है और हमने कार्रवाई की है।
• 2017 में सरकार ने कुछ मानदंड तय किए थे, जिनका पालन नहीं किया गया। इस मामले में अंतरराष्ट्रीय मार्केट में लाखों-करोड़ का व्यवसाय जैविक कपास के नाम पर किया जा रहा था।
• यानी 5,000 रुपए प्रति क्विंटल का कपास अंतरराष्ट्रीय मार्केट में 15,000 रुपए प्रति क्विंटल में बिक रहा था। घोटाला करने वालों ने सारा खेल ट्रांसफर सर्टिफिकेट के जरिए किया गया, फिर प्रोडक्ट को ऑर्गेनिक बताकर कमाई की।
– Digvijay Singh, Senior Congress Leader




