बीजेपी के लोग घोर आरक्षण विरोधी है। हमें तो पहले से संदेह ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास था कि ये लोग दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अतिपिछड़ों के आरक्षण को बढ़ने से रोकने एवं समाप्त करने का प्रयास करेंगे। हमारी सरकार के जाति आधारित सर्वे को भी इन लोगों ने हर स्तर पर रुकवाने की भरसक कोशिश की थी।
- ದೇಶದ ರಾಜ್ಯಗಳಲ್ಲಿ ಕೊನೆಯ ಬಾರಿ ಕಾಂಗ್ರೆಸ್ ಸಿಎಂ ಇದ್ದದ್ದು ಯಾವಾಗ?
- ನಮ್ಮ ತಲೆಮಾರಿನ ರಾಜಕಾರಣಿಗಳು, ಭವಿಷ್ಯದ ಯುವ ನಾಯಕರಿಗೆ ಸಿದ್ದರಾಮಯ್ಯ ಸ್ಫೂರ್ತಿ: ಪ್ರಿಯಾಂಕ್ ಖರ್ಗೆ
- ಸಿಎಂ ಸ್ಥಾನಕ್ಕೆ ರಾಜೀನಾಮೆ ನೀಡಿದ ನಂತರ ಸಿದ್ದರಾಮಯ್ಯ ಹೇಳಿದ್ದೇನು?
- ಸಿಎಂ ಸ್ಥಾನಕ್ಕೆ ಸಿದ್ದರಾಮಯ್ಯ ರಾಜೀನಾಮೆ: ಯಾರು, ಏನೆಂದರು?
- ಹಣಕಾಸು ಮಂತ್ರಿಗಳಾಗಿ ಸಿದ್ದರಾಮಯ್ಯ ಸಾಧಿಸಿದ ಆರ್ಥಿಕ ಶಿಸ್ತು ಒಂದು ಪಠ್ಯದಂತಿದೆ: ಬಿ ಶ್ರೀಪಾದ ಭಟ್
बीजेपी और बीजेपी मानसिकता के लोग हमेशा ही सामाजिक न्याय और आरक्षण संबंधित मामलों को किसी ना किसी माध्यम से अटकाने, भटकाने व लटकाने का कुचक्र रचते रहते है। कुछ लोग सामाजिक आर्थिक समानता के शुरू से ही कट्टर विरोधी है। बाबा साहेब अंबेडकर एवं जननायक कर्पूरी ठाकुर की विचारधारा और संविधान से इनको नफ़रत है।
हमने सरकार में रहते लाखों नौकरियां प्रक्रियाधीन की और आगामी नियुक्तियों में वंचित, उपेक्षित और उत्पीड़ित वर्गों के लाखों अभ्यर्थियों को इसका लाभ भी मिलता इसलिए आरक्षण की 75% सीमा को अटका दिया गया है।
हमने जातिगत सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक करने के पश्चात् आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 75% किया और उसके तुरंत बाद इसे कैबिनेट से स्वीकृत करने के उपरांत संविधान की 9वीं अनुसूची में डालने के लिए बीजेपी की केंद्र सरकार को भेज दिया था।
10 दिसंबर 2023 को पटना में केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित पूर्वी क्षेत्र परिषद की बैठक में भी हमने इसे 9वीं अनुसूची में डालने का आग्रह किया था लेकिन 6 माह बीतने के बाद भी बीजेपी सरकार ने ऐसा नहीं किया। यह दर्शाता है कि बीजेपी जातिगत जनगणना और आरक्षण के खिलाफ है। समस्त लोकसभा चुनाव में हम निरंतर इसकी मांग करते रहे।
हाइकोर्ट के फ़ैसले के बाद बिहार सरकार अविलंब सुप्रीम कोर्ट जाए अन्यथा राजद सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। हमारी माननीय मुख्यमंत्री से भी माँग है कि वो लेकर सर्वदलीय डेलीगेशन के साथ प्रधानमंत्री से मिले ताकि हम पुरजोर तरीके से इसे 9वीं अनुसूची में डालने संबंधित अपनी बात रख सकें।
- Tejaswi Yadav




