भारत की विदेश नीति में जैसा बिखराव है, उस वजह से भारत का प्रभाव विश्व में कम हो रहा है। यह सबके लिए दुख की बात है।
- ಮಹಿಳೆಯರಿಗೆ ಶೇ.33ರಷ್ಟು ಮೀಸಲಾತಿ ಮಸೂದೆ ಅಂಗೀಕಾರವಾಗಿದೆ
- ಮಹಿಳಾ ಮೀಸಲಾತಿ ವಿಷಯದಲ್ಲಿ ಮೋದಿ ಸರ್ಕಾರದಿಂದ ಮಹಿಳೆಯರಿಗೆ ದ್ರೋಹ: ಸಿದ್ದರಾಮಯ್ಯ
- ಕಾಂಗ್ರೆಸ್ಗೆ ಮಹಿಳಾ ಮೀಸಲಾತಿ ಬೇಕಿಲ್ಲ ಎಂಬುದು ಸ್ಪಷ್ಟ: ಬಸವರಾಜ ಬೊಮ್ಮಾಯಿ
- ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಆರೋಗ್ಯ ವ್ಯವಸ್ಥೆ ಎಷ್ಟು ಹದಗೆಟ್ಟಿದೆ ಎನ್ನುವುದಕ್ಕೆ ಕನ್ನಡಿ: ಆರ್ ಅಶೋಕ್
- ನಮ್ಮ ಪ್ರತಿಭೆಗಳು ದೆಹಲಿಯಲ್ಲಿ ನಿರ್ಣಾಯಕ ಪಾತ್ರ ವಹಿಸುತ್ತಿರುವುದು ಸಂತಸದ ವಿಷಯ: ಕೆ.ಸುಧಾಕರ್
भारत देश ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व किया।
• दुनिया के जिन देशों और महाद्वीपों में आज़ादी के लिए, रंगभेद के खिलाफ बड़े संघर्ष हुए, उन्होंने भारत की अगुवाई को माना, भारत की आवाज़ को सुना- चाहे वह अफ्रीका हो, लैटिन अमेरिका हो या एशिया के देश हों।
• 50 के दशक में जब कोरिया का crisis हुआ था, तब दुनिया ने समाधान के लिए भारत की तरफ देखा था। यह एक ऐतिहासिक सत्य है कि हर चुनौती के समय विश्व, भारतवर्ष की आवाज़ सुनता था, क्योंकि हमारे पास सबसे बड़ी शक्ति हमारी नैतिकता थी और मानवता की आवाज़ थी, लेकिन आज ये दोनों कम हुई हैं।
• जब हम राष्ट्रहित को आगे रखते हैं, तो उसके पीछे एक आम सहमति देश की रहती है, लेकिन मौजूदा सरकार में ये नहीं दिखता। राष्ट्रहित में हमारी कूटनीति और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर एकतरफा फैसले लेने पर रोक लगनी चाहिए।
• इस विषय पर सरकार को विचार कर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। वास्तविकता को स्वीकार करें और जो देश के बड़े दल हैं, उनके नेताओं के साथ बैठकर भी विचार-विमर्श करें।
हम यह समझते हैं कि आने वाले संसद सत्र में विदेश नीति और देश की समस्याओं, चुनौतियां पर व्यापक चर्चा हो।
– Anand Sharma, राज्य सभा सांसद




